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  • Namrood

    एक ऐसा बादशाह था जिसके पास सब कुछ था दौलत, ताज, लश्कर, महल…मगर सबसे खतरनाक चीज जो उसके पास थी,वो था तकब्बुर।वो कहता था कौन मुझे गिरा सकता है?मैं ही इस ज़मीन का खुदा हूँ।पुराने इराक़ की ज़मीन, बाबुल का शहर,उसके नाम से कांपता था।लोग उसके साए में जीते थे,और इंसानियत उसके घमंड के नीचे दब चुकी थी।एक रात…ख़ामोशी में एक आवाज़ उठी।एक नुजूमी ने कहा—एक बच्चा पैदा होने वाला है,जो तेरी हुकूमत और तेरे खुदा होने के दावे को तोड़ देगा।नमरूद का चेहरा पीला पड़ गया।सोने के महलों में भी डर उतर आया।हुक्म निकला—हर नये पैदा होने वाले बच्चे को क़त्ल कर दिया जाए।गलियाँ रोने लगीं।माँओं की गोद सूनी होने लगी।ज़ुल्म ने इंसानियत का गला दबा दिया।लेकिन…जिसे अल्लाह बचाना चाहे,उसके लिए दुनिया के सारे दरवाज़े बंद हो जाएँतो भी एक आसमान का दरवाज़ा खुल जाता है।एक पहाड़ी गुफ़ा…गहरी ख़ामोशी…और उसी ख़ामोशी के सीने सेएक नूर फूट पड़ा।हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की पैदाइश हुई।बाहर ज़ुल्म का अंधेरा था,और अंदर अल्लाह एक रोशनी तैयार कर रहा था—जो आने वाले ज़मानों को बदलने वाली थी।बचपन गुफ़ा में गुज़रा।सवाल दिल में पलता रहा।जब वो बाहर आए,तो देखा—लोग पत्थरों के आगे झुके हुए हैं।कोई सितारों को खुदा कहता है,कोई चाँद को,कोई सूरज को।इब्राहीम अलैहिस्सलाम का दिल गवाही देता था—जो डूब जाता है, वो खुदा नहीं हो सकता।उन्होंने पूछा—क्या ये पत्थर तुम्हें सुन सकते हैं?लोग हँस पड़े।ये हमारे बाप-दादा के माबूद हैं।इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने कहा—ना ये तुम्हें फ़ायदा दे सकते हैं,ना नुकसान…फिर तुम इन्हें रब कैसे मानते हो?एक दिन शहर खाली था।मेला लगा था।इब्राहीम अलैहिस्सलाम इबादतगाह में दाख़िल हुए।चारों तरफ़ ख़ामोशी…और सदियों का जमा हुआ झूठ।एक-एक करके बुत टूटते चले गए।और आख़िर में कुल्हाड़ीसबसे बड़े बुत के कंधे पर रख दी गई।जब लोग लौटे,तो क़यामत मच गई।इब्राहीम अलैहिस्सलाम दरबार में लाए गए।नमरूद सामने बैठा था—ताज, तख़्त और घमंड के साथ।नमरूद बोला—मैं ज़िंदगी और मौत देता हूँ।इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने कहा—मेरा रब सूरज को मशरिक़ से निकालता है,अगर तू खुदा हैतो उसे मगरिब से निकाल।दरबार ख़ामोश हो गया।तकब्बुर पहली बार लाचार दिखा।फैसला हुआ—इब्राहीम को आग में डाल दिया जाए।आग जलाई गई—इतनी भयानककि परिंदे भी पास न आएँ।इब्राहीम अलैहिस्सलाम को आग में फेंका गया।और फिर…आसमान से हुक्म उतरा—ऐ आग!ठंडी और सलामती बन जा।आग बिछौना बन गई।शोले फूल बन गए।इब्राहीम अलैहिस्सलाम सलामत खड़े थे।नमरूद जीत नहीं सका।और आखिरकार…एक छोटा सा मच्छरउसके घमंड को खा गया।जो खुद को खुदा कहता था,वो एक मामूली तकलीफ़ से टूट गया।ये कहानी सिर्फ़ गुज़री हुई नहीं है…ये आज भी ज़िंदा है।

    Comment me alhamdulillah jarur likhe

  • Sabina तहज्जुद की खूबसूरत बातें

    asalamo alaikum

    तहज्जुद की खूबसूरत बातें

    इस सारी कायनात के मालिक अल्लाह तआला से उस वक़्त बात करना जबकि सारी दुनिया बेख़बर हो तो सबसे बेहतर वक़्त तहज्जुद का वक़्त है जब अल्लाह तआला अपने बन्दों से फरमाता है कि है कोई मांगने वाला जो मुझसे मांगे और मैं अता करू, तो उस वक़्त जिनको तौफ़ीक़ मिलती है वो बन्दे उठते हैं और अपनी दरख्वास्त अल्लाह के सामने पेश करते हैं तो फिर अल्लाह उनकी इल्तिजाओं को रद नहीं करता और अपनी शान के मुताबिक़ अता करता है, तो आज हम तहज्जुद के बेनेफिट्स और तहज्जुद के कुछ कोट्स (तहज्जुद के बेनिफिट्स | तहज्जुद कोट्स इन हिंदी) बयान करेंगे जिससे आपको तहज्जुद के वक़्त उठने में मोटिवेशन मिलेगी

    तहज्जुद की खूबसूरत बातें

    तहज्जुद सुकून है, दिल का इलाज है. जख्मों का मरहम है, दुआओं की कबूलियत है, सबसे बढ़कर रब से मुलाकात है, तहज्जुद तो ऐसा इश्क है जो खुद आशिक को अपने महबूब से होता है

    जो रात के आखिरी पहर अपनी नींद कुर्बान करके तहज्जुद में उठता है तो अल्लाह पाक उसको बहुत ही प्यार से देख रहा होता है और फरिश्तों से कहता है कि देखो ये है मेरा लाडला बंदा, इसने बिस्तर के साथ बेवफाई की, बस मेरी खातिर यह अपना बिस्तर छोड़ कर आया है.

    बस मेरी खातिर यह अपनी नींद कुर्बान करके आया है इसलिए फरिश्तों, बस तुम गवाह रहना में हमेशा इसके साथ हूं, तुम गवाह रहना मैंने इसकी हर दुआ कबूल कर ली

    फिर तुमने कैसे सोच लिया कि वह तुम्हारी नींद से कुर्बान सजदों की लाज नहीं रखेगा तुमने कैसे सोच लिया कि वह तुम्हें खाली हाथ लौटा देगा, उसको खाली हाथ लौटना तो आता ही नहीं, बल्कि जितना मांगा है उससे ज्यादा दे सकता है.

    वह रब अपने बंदों को मायूस नहीं करता तुमने कैसे सोच लिया कि रात के आखिरी पहर अपने रब के सामने हाथ उठाओ, तुम उसको पुकारो और वह ना सुने, तुम तड़प कर मांगो और वह मदद ना भेजें

    लाडले की जिद की ख्वाहिश की लाज तो माँ भी रख लेती है फिर वह 70 माओं से ज्यादा प्यार करने वाला रब उससे कैसे मायूस हो सकते हो, यह जानते हुए भी कि वह सिर्फ सब्र का इम्तिहान लेता है लेकिन कभी मेहरूम नहीं रखता, यकीन रखो वो तुम्हारी हर दुआ पर राज़ी है, हर आंसू पर राज़ी है तुम्हारी बेबसी पर राज़ी है, तुम्हारी खामोशी पर राज़ी है. तुम्हारे सन्न पर भी राज़ी है, अगर वो तुम्हें यहाँ तक ले आया है तो यक़ीन रखो वहां तक भी ले जायेगा

    जो कहानी एक बार उसे तहज्जुद के वक़्त सुना दी जाती है, वो उसे मुकम्मल किए बगैर वापस नहीं मुड़ता, वह वक्ते तहज्जुद तुम्हारी दास्तां सुनाने के लिए आंखों से नींद चुरा लेता है.. वह वक्त तहज्जुद बहाए गए आंसुओं का भरम रखता है,, वह बेचैनी को दिल में और आंसुओं को आंखों में उतार देता है, ताकि तुम अपनी तड़प में उसे रब की मोहब्बत महसूस कर सको

    वह सब सुनता है हर चीज से वाकिफ है बस तुम से गुफ्तगू करने के लिए छोटे-छोटे जरिए बनाता है वह करोड़ों में से तहज्जुद के लिए चुनता है और यह उसकी मोहब्बत ही तो है जो तुम्हारे सजदों और तड़प को तहज्जुद तक ले आता है वह सजा नहीं दे रहा है यह तकलीफ और बेसुकूनी तो तुमको उसे तक ले जाने ले जाने का बहाना है

    जिसने नसीब लिखा है वह नसीब बदल भी सकता है तो फिर मुतमइन हो जाओ और अल्लाह पर यकीन रखो क्योंकि वह उन्हीं दुआओं को तहज्जुद तक लाता है जिनको उसने पूरा करना होता है

    तहज्जुद का बस एक सजदा तुम्हारा सारा नसीब मोड सकता है तहज्जुद में बहाया गया बस एक आंसू अल्लाह को तुमसे राजी कर सकता है जो दुआओं से ना हो सका तहज्जुद से उसका होना भी हो सकता है, जो बंद हो गया हमेशा के लिए तहज्जुद से वह दरवाजा खुल सकता है

    डरो नहीं, तहज्जुद के इन अंधेरों में तुम्हारे लिए मुआजज़ा छुपा हो सकता है, दो जहानों में ऐसा कुछ भी नहीं जो तहज्जुद में नहीं मिल सकता

    जो अल्लाह की मोहब्बत को अव्वल रखते हैं अल्लाह भी उनकी मोहब्बत को जाया नहीं होने देता तुम उसकी मोहब्बत का हक अदा करो वह तुम्हारी मोहब्बत का हक अदा करेगा तुम उसके फैसलों पर दिल से राजी हो जाओ वह तुम्हारी दुआओं पर खुशी से राजी हो जाएगा,

    तुम एक दफा अपनी चाहत के लिए उसके सामने हाथ तो उठा कर देखो वह तुम्हारी चाहत को ही तुम्हारा नसीब लिख देगा

    रात के आखिरी पहर मांगी गई दुआओं में बहुत ताकत होती है क्योंकि उसमें इंसान से ज्यादा अल्लाह की रजा मौजूद होती है और जिन दुआओं में अल्लाह की रजा मौजूद होती है जल्द या देर उनके लिए आसमान से कुबूलियत का परवाना उतर ही आता है

    अल्लाह की बेशुमार रहमतों में से एक रहमत तहज्जुद है कि उसने हमारे दुख सुनने के लिए पूरी दुनिया सुला दी है ऐसा इस दुनिया में कुछ भी नहीं जो तहज्जुद से किसी को मिला नहीं तहज्जुद में की गई इल्तिजाए अल्लाह कभी रद्द करता ही नहीं

    हमारा रब अल्लाह कहता है मांगो मुझसे कैसे हो सकता है कि में दू नहीं, अल्लाह तो वो भी सुनता है जो तुम किसी से भी कहते नहीं कुरआन में अल्लाह के मुअजजों की दलीलें तुम्हारे लिए काफी नहीं हैं क्या तुम्हें मूसा अलैहिस सलाम और यूसुफ अलैहिस सलाम का किस्सा याद नहीं, जो किस्से याद दिलाते हैं कि ऐसा क्या है जो अल्लाह की एक कुन से नहीं हो सकता, या जो अल्लाह की दस्तरस और उसकी पहुँच से बाहर हो

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